Urban wall : शहर की शक्ल

शहर की दीवारें उसका चेहरा हुआ करती हैं। ये दीवारें कभी राजनीतिक हलचलों का बिंब हुआ करती थीं। बदलते समय के साथ यह चरित्र खो गया। हालांकि बिंब तो अभी भी हैं ये दीवारें, बस उसका कंटेंट बदल गया है। ध्यान से देखिए तो कई सारी कहानियां इन दीवारों पर बिखरी मिलेंगी। इन्हीं बिखरी और धूल में लिपटी कहानियों को मैनें समेटने का सिलसिला शुरू किया है। नहीं मालूम यह, कितना दूर जाएगा, फिलहाल इसकी चिंता भी नहीं है। अभी तो बस कैप्चर करना है। इस प्रयास की कड़ी में चार-पांच तस्वीरों की पहली किश्त आपके साामने है।
लेकिन इसके पहले शहनाज इमरानी की दीवारों पर लिखी गई एक खूबसूरत कविता की कुछ पंक्तियां- 
 दीवारें दिलों में नफ़रत की
दीवारें घरों में सुरक्षा की
कुछ टूटे हुए लोग रोते हैं इनसे लिपट कर
कुछ थके हुए लोगों का सहारा होती है
कुछ दीवारें फलाँग जाते है और कुछ दीवारें तोड़ते है
कुछ तस्वीरें, पोस्टर और नारो से भरी
कहीं कैनवास बनी चित्रकार का
और कहीं इनसान के हाथों दुरुपयोग का

 आस्था का संबल

जीवन और उसका भरोसा

बेरंग दीवारों के रंग 

 खाली दीवार




Comments